अनछुए पहलू

क्या लिखूं

‘जीवन का मूल्य’ – काव्य संग्रह

‘जीवन का मूल्य’ जीवन का मूल्य उनसे पूछो,जिनको रहने को घर नहीं,खाने को अन्न नहीं,हम तो बहुत सम्पन्न है, परफिर भी रोते ऐसे,जैसे हम बहुत … Read more

गाड़ी बुला रही है,सीटी बजा रही है,चलना ही जिंदगी है,चलती ही जा रही है

गाड़ी बुला रही है,सीटी बजा रही है,चलना ही जिंदगी है,चलती ही जा रही है

यानि अबतक ज़िन्दगी कुछ वक़्त के लिए थम सी गई थी, जिन पटरियों पर कभी ट्रेनों का आना जाना थमता ना था वो भी रुक … Read more