Hindi me ghazal

क्या लिखूं

गजल: बद्दुआ, समझा- शिव काशी

सर्द आहें, दर्द, आँसू, सिसकियों की बद्दु आइश्क़ को फिर यूँ लगी कुछ हिचकियों की बद्दुआ ज़ख़्म देकर ज़िन्दगी को, रंग ख़ुद से छीने हैं … Read more