सोमनाथ मंदिर: टूट कर बिखर कर फिर भी जो चमकता रहा

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धार्मिक मान्यताएं: सोमनाथ मंदिर

श्लोक- शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद
सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।
श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय
तस्मै शिव काराय नम: शिवाय:।।

भारत में अनेकों धार्मिक स्थल हैं जिनकी चर्चा पुरे विश्व में होती है। भारत भूमि मंदिरों से भरी हुई है, और हर मंदिरों की अपनी खासियत, अपनी मान्यता हैं। सनातन धर्म में विश्वास रखने वाले इन मंदिरों से केवल धार्मिक रूप से ही नहीं, भावात्मक रूप से भी जुड़ जाते हैं।

इन्हीं मंदिरों में आता है सोमनाथ मंदिर जो की भारत के पश्चिमी छोर पर  गुजरात में स्थित अत्यन्त प्राचीन व ऐतिहासिक सूर्य मन्दिर का नाम है। 
सोमनाथ मंदिर जो की गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बन्दरगाह में स्थित है।

सोमनाथ मंदिर, भगवान शंकर के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। मान्यता यह है कि सोमनाथ मंदिर सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग है। सोमनाथ मंदिर के प्रथम ज्योतिर्लिंग होने की व्याख्या ऋग्वेद, श्रीमद भगवत गीता तथा स्कन्द पुराण में मिलता है।

कहा जाता है, सोमनाथ मंदिर की स्थापना स्वयं चन्द्रमा अर्थात सोम (चन्द्रदेव)  ने की थी। इसका उल्लेख ऋग्वेद में स्पष्ट रूप में किया गया है।

ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर में पहले शिवलिंग बिना किसी आधार के हवा में झुलता था। शिवलिंग चुम्बकीय शक्ति से हवा में ही स्थि‍त था।
कहा जाता है कि महमूद गजनवी इसे देखकर हतप्रभ रह गया था।

 सोमनाथ मंदिर तीर्थ पितृगणों के श्राद्ध, नारायण बलि आदि कर्मो के लिए काफी प्रसिद्ध है। चैत्र(अप्रैल), भादप्रद(सितम्बर), कार्तिक (नवम्बर) माह में यहां श्राद्ध करने का विशेष महत्व बताया जाता है।

इन तीन महीनों में यहां श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ होती है।

इसके साथ ही  यहां तीन नदियों हिरण, कपिला और सरस्वती का महासंगम होता है। इस त्रिवेणी स्नान का विशेष महत्व है।

सोमनाथ मंदिर

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आइये नजर डालते हैं इस ऐतिहासिक मंदिर के इतिहास पर-

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमनाथ मंदिर का निर्माण 3 करोड़ 14 लाख 25 हजार 103 साल पहले त्रेता युग मे सोम ने करवाया था।

वैसे तो धार्मिक आधार पर कहा जाता की भगवान श्री कृष्ण ने यहीं इसी स्थान में अपना देहत्याग किया था। जिसके कारण इस स्थान का महत्व और अधिक बढ़ गया।

सोमनाथ मंदिर को हिंदू धर्म के उत्थान-पतन के इतिहास का सदैव प्रतीक माना गया है। अत्यंत वैभवशाली होने के कारण इतिहास में कई बार इस मंदिर को तोड़ा गया, कई बार आक्रमण किया गया तथा इसे फिर से र्निर्मित किया गया।

वर्तमान समय के सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का आरंभ भारत की स्वतंत्रता के पश्चात् लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने करवाया था। पहली दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने सोमनाथ मंदिर को राष्ट्र को समर्पित किया। 

सोमनाथ मंदिर

सोमनाथ मंदिर धार्मिक रूप से तथा साथ ही पर्यटन के रूप से भी विश्व में प्रसिद्ध स्थल है।

यहां रोजाना शाम को मंदिर के प्रांगड़ में साउंड एंड लाइट शो चलता है। शाम को साढ़े सात से साढ़े आठ बजे तक यह कार्यक्रम चलता है। जिसे देखने दूर देशों से भी योग आते हैं। इस शो में सोमनाथ मंदिर के इतिहास का बहुत ही सुंदरता के साथ सचित्र वर्णन किया जाता है।

सोमनाथ मंदिर का इतिहास बहुत ही रोमांचित कर देने वाला है, क्योंकि ये मंदिर ही हमारे आराध्य भोले बाबा का है। इस मंदिर को इतनी बार लुटा गया, गिराया गया पर हर बार ये और मजबूती के साथ उठ खड़ा हुआ।

इतिहास में है कि जिस स्थान पर सोमनाथ मंदिर स्थापित किया गया है उस स्थान पर ईसा पूर्व में एक मंदिर अस्तित्व में था। उसी स्थान पर सातवीं शताब्दी में वल्लभी के मैत्रक राजाओं ने इस मंदिर का पुनःनिर्माण किया था।

आठवीं सदी

आठवीं सदी में इस मंदिर को नष्ट करने के लिए सिंध के अरबी गवर्नर जुनायद ने अपनी सेना भेजी।

पुनः गुर्जर प्रतिहार राजा नागभट्ट ने 815 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर का पुनः निर्माण करवाया। इस मंदिर की ख्याति दूर दूर तक फैली थी। जिसको सुन कर हर शासक इसे लूटने की योजना बनाता था।

अरब यात्री अल बरुनी ने भारत यात्रा के पश्चात अपनी यात्रा वृतांत में सोमनाथ मंदिर का इतना खूबसूरत चित्रण किया था कि उस वृतांत से प्रभावित होकर महमूद गजनवी ने सन 1024 में अपने 5,000 सैनिकों के साथ सोमनाथ मंदिर पर हमला कर दिया, और मंदिर की सम्पत्ति लूट कर चला गया। मंदिर को उसने तहस नहस कर दिया।
इतिहास में दर्ज है कि उस आक्रमण के दौरान मंदिर में 50,000 लोग हाथ जोड़कर पूजा कर रहे थे उन सभी लोगो को मार दिया गया था।

सोमनाथ मंदिर

इस आक्रमण के पश्चात गुजरात के राजा भीम तथा मालवा के राजा भोज ने इसका पुनः निर्माण करवाया। जब दिल्ली सल्तनत ने सन 1297 में गुजरात पर अपना शासन स्थापित किया तो उसने भी सोमनाथ मंदिर को गिरवा दिया। यह पांचवी बार मंदिर को गिराया गया।
जब औरंगजेब आया उसने पुनः सन 1706 में इसे फिर से गिरा दिया।
हर बार इस मंदिर को गिराया जाता था उसके बाद इसका पुनः निर्माण होता था।

मंदिर का बार-बार खंडन किया गया, मंदिर का जीर्णोद्धार होता रहा पर ईश्वर की महिमा देखिये शिवलिंग यथावत अपने स्थान पर रहा।
लेकिन सन 1025 में महमूद गजनी ने जो शिवलिंग खंडित किया, वह यही आदि शिवलिंग था।

उसके बाद मंदिर में प्रतिष्ठित किए गए शिवलिंग को  सन 1300 में अलाउद्दीन ख़िलजी की सेना ने एक बार फिर से खंडित कर दिया।

इसके बाद कई बार मंदिर और शिवलिंग को खंडित किया गया। कहा जाता है कि आगरा के किले में रखे देवद्वार सोमनाथ मंदिर के हैं।

जिसे महमूद गजनी सन 1025 में लूटपाट के दौरान अपने साथ ले गया था।

भारत सरकार के पुरातत्व विभाग  द्वारा उत्खनन से प्राप्त ब्रह्मशिला पर भगवान शिव का ज्योतिर्लिग स्थापित किया गया है।

सौराष्ट्र के पूर्व राजा दिग्विजय सिंह ने 8 मई 1950 को सोमनाथ मंदिर की आधारशिला रखी थी तथा 11 मई 1951 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद द्वारा मंदिर में ज्योतिर्लिग स्थापित किया गया।

वर्तमान समय के सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का आरंभ भारत की स्वतंत्रता के पश्चात् लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने करवाया था। पहली दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने सोमनाथ मंदिर को राष्ट्र को समर्पित किया। 

सोमनाथ मंदिर धार्मिक रूप से तथा साथ ही पर्यटन के रूप से भी विश्व में प्रसिद्ध स्थल है।

यहां रोजाना शाम को मंदिर के प्रांगड़ में साउंड एंड लाइट शो चलता है। शाम को साढ़े सात से साढ़े आठ बजे तक यह कार्यक्रम चलता है। जिसे देखने दूर देशों से भी योग आते हैं। इस शो में सोमनाथ मंदिर के इतिहास का बहुत ही सुंदरता के साथ सचित्र वर्णन किया जाता है।

सोमनाथ मंदिर का इतिहास बहुत ही रोमांचित कर देने वाला है, क्योंकि ये मंदिर ही हमारे आराध्य भोले बाबा का है। इस मंदिर को इतनी बार लुटा गया, गिराया गया पर हर बार ये और मजबूती के साथ उठ खड़ा हुआ।

इतिहास में है कि जिस स्थान पर सोमनाथ मंदिर स्थापित किया गया है उस स्थान पर ईसा पूर्व में एक मंदिर अस्तित्व में था। उसी स्थान पर सातवीं शताब्दी में वल्लभी के मैत्रक राजाओं ने इस मंदिर का पुनःनिर्माण किया था।

सोमनाथ मंदिर

सोमनाथ मंदिर के वास्तविक स्थान पर ही नवनिर्मित मंदिर को  सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा स्थापित किया गया है। राजा राजकुमार पॉल द्वारा आखिरी बार यहीं मंदिर बनवाया गया था।

1962 में नवनिर्मित सोमनाथ मंदिर बन के स्थापित हो गया था।
1970 में जामनगर की राजमाता ने अपने पति की स्मृति में उनके नाम का द्वार ‘दिग्विजय द्वार’ बनवाया था।

सोमनाथ मंदिर के दक्षिण में समुद्र के किनारे स्थित स्तम्भ में दिशा सूचक एक बाण लगा है उसपर लिखे शिलालेख के अनुसार दक्षिण दिशा में सोमनाथ मंदिर से अंटार्कटिका ( दक्षिणी ध्रुव) तक कोई थलमार्ग नही है, सिर्फ जल मार्ग ही है।

सोमनाथ मंदिर

मंदिर की रचना-

सोमनाथ मंदिर को गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप- तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है। मंदिर का 150 फुट ऊँचा शिखर है। इसके शिखर पर स्थित कलश का भार 10 टन है तथा इसकी ध्वजा 27 फुट ऊँची है।

सोमनाथ मंदिर के अबाधित समुद्री मार्ग, त्रिष्टांभ के विषय में ऐसा लिखा गया है कि यह समुद्री मार्ग परोक्ष रूप से दक्षिणी ध्रुव में समाप्त हो जाता है।

इस मंदिर की रचना हमारे प्राचीन लोगों के ज्ञान व सूझबूझ का अद्‍भुत साक्ष्य माना जाता है।  

सोमनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से प्रथम ज्योतिर्लिंग है। हिन्दुओं की मान्यता के साथ साथ धार्मिक आस्था भी इस मंदिर से जुडी हुईं हैं। यही कारण है कि इस मंदिर को जितनी बार लुटा गया, तोड़ा गया, फिर से यह मंदिर उठ खड़ा हुआ। यह भक्तों की आस्था का प्रतीक है।

हर बार इस मंदिर को लूटा गया, बार बार आक्रमण हुए लेकिन मंदिर की महिमा, गरिमा को कोई धराशायी नहीं कर पाया। आज भी उसी शान के साथ यह मंदिर अपनी जगह पर स्थित है।

सोमनाथ मंदिर हो या भारत का कोई अन्य मंदिर हर मंदिर के बारे में कुछ किवदन्तियां होती हैं, जिन्हें सुन कर पढ़ कर ईश्वर के होने का अनुभव होता।

यही कथाएं, रोचक तथ्य मंदिर के बारे में और अधिक जानकारी देती हैं। आइये जानते हैं कुछ रोचक किवदंतिया…

सोमनाथ मंदिर

प्राचीन हिन्दू ग्रन्थ

प्राचीन हिन्दू ग्रन्थों के अनुसार, सोम अर्थात चन्द्रमा ने राजा दक्ष की 27 कन्याओं से विवाह किया था, लेकिन वो उन सभी पत्नियों में से केवल अपनी पत्नी रोहिणी को ही मानते थे अन्य पत्नियों को नहीं।
जिसके फलस्वरूप राजा दक्ष ने क्रोधित हो कर चन्द्रमा को श्राप दिया की अब से तुम्हारा तेज (चमक), क्षीण अर्थात धीरे धीरे समाप्त होने लगेगा।
श्राप से विचलित हो कर चन्द्रदेव ने भगवान शिव की आराधना शुरू कर दी, जिससे भगवान शिव ने प्रसन्न हो कर उन्हें श्राप मुक्त कर दिया। सोम अर्थात चन्द्रदेव ने अपने कष्टों का निवारण करने वाले आराध्य देव शिव की स्थापना इस जगह की, जो आज के समय में सोमनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है। इसका उल्लेख ऋग्वेद में है।

दूसरी रोचक कथा यह है कि, जब महाभारत का युद्ध समाप्त होने के पश्चात, श्री कृष्ण भालुका तीर्थ के किनारे पर विश्राम कर रहे थे, तभी शिकारी ने उनके पैर के तलवे में बने पद्मचिन्ह को हिरण की आँख समझकर धोखे से तीर मार दिया था। उसके पश्चात श्री कृष्ण देह त्याग कर इसी स्थान से वैकुंठ को प्रस्थान किया था। इसी सोमनाथ मंदिर के पास ही श्री कृष्ण का बहुत ही आकर्षित कर देने वाला सुंदर मंदिर बना है।
यदि आप सोमनाथ मंदिर घूमने जाएँ तो दर्शन करने जरूर जाइएगा।

हिन्दू धर्म यानि सनातन धर्म इतना व्यापक है कि आपको हर मंदिर हर स्थान से जुड़ा कोई ना कोई ऐसा तथ्य या कोई ऐसी कहानियां, कथाएं मिल ही जाएंगी। जिनको सुनने के बाद आप रोमांच से भर जाएंगे, ईश्वर के प्रति आपकी आस्था और दुगनी हो जाएगी। सकरात्मकता का एक प्रवाह आप में प्रवाहित होने लगेगा।

आइये जानते हैं कुछ और रोचक तथ्य सोमनाथ मंदिर के बारे में-

  • कहा जाता है कि शिवलिंग की चुम्बकीय प्रभाव के कारण हवा में झूलता रहता था, बाद में इसपर जब अध्ययन किया गया तो इस रहस्य का पता लगा की भगवान शिव के इस विशाल मंदिर में रेडियोधर्मी (radioactivity) गुण है जिसकी वजह से यह पृथ्वी के ऊपर अपना  सन्तुलन बनाये रखता है।
  • गजनवी यही देख कर हक्का बक्का रह गया, उसने 18 करोड़ का खजाना लुटा था और 50,000 लोगों का कत्ल कर दिया था।
  • परन्तु हिंदुओं की आस्था का अंत नहीं हुआ था, वे फिर भी उसी स्थान की पूजा करते रहे।
  • औरंगजेब के आक्रमण के बाद जब शिवाजी महाराज के अदम्य साहस और अनेक युद्धों के बाद जब यह क्षेत्र मराठाओं के अधिकार में आया, तब 1783 ईस्वी में इंदौर की, शिवभक्त रानी अहिल्याबाई ने मूल मंदिर से थोड़ा सा हटकर, पूजा के लिए सोमनाथ महादेव का नया मंदिर बनवाया था।
  • यहां एक गोमती नदी है जिसके बारे में कहा जाता की वह सूर्य के उदय होने के साथ बढ़ती है और अस्त होने के साथ घट जाती है।
  • इस प्रकार के अनेकों रोचक तथ्य हैं भारतीय मंदिरों के बारे में।
  • भारत देश अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। दूर देशों, विदेशों से लोग इन्हीं स्थानों को देखने आते हैं।
सोमनाथ मंदिर

आवागमन-

आप सोमनाथ मंदिर तक तीनों मार्ग से आसानी से जा सकते हैं,

बस का रूट, ट्रेन के रूट से छोटा पड़ता है। साथ ही सड़क के दोनों ओर की हरियाली आपके मन को मोह लेगी।

सोमनाथ के पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व होने की वजह से कई राज्य परिवहन बसें और निजी बसें हैं जो नियमित अंतराल पर चलती रहती हैं। 

दीव से सोमनाथ लगभग 85 किमी दूरी पर है। जहाँ बस से करीब 2 से 2.5 घंटे में आप सोमनाथ पहुँच सकते हो।

वेरावल से सोमनाथ सिर्फ 6 किमी की दूरी पर है। 15 से 20 मिनिट में आप सोमनाथ पहुँच सकते हो।

अहमदाबाद से सोमनाथ लगभग 420 किमी दुरी पर है जो करीब 8 घंटे के बस के सफर के बाद आप सोमनाथ पहुँच जाएंगे।

सोमनाथ का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट 90 किमी दूर दीव में है। दीव एयरपोर्ट सिर्फ मुंबई से जुड़ा है। अगर आप हवाई सफर करना चाहते हैं तो आपको निश्चित रूप से दीव पहुंचना पड़ेगा।

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धन्यवाद।

हर हर महादेव

-पारुल त्रिपाठी

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